खबर का असर : विभाग ने बढ़ाई छापेमारी, घी-पनीर-खोआ के 60% नमूने फेल; 23 में नकली होने की पुष्टि
आगरा। त्योहारों पर जिस पनीर, खोआ और घी को शुद्ध समझकर घरों और मिठाई की दुकानों में इस्तेमाल किया जा रहा है, उसकी शुद्धता पर आई-नेक्स्ट की पड़ताल ने बड़ा सवाल खड़ा किया था। एनालॉग पनीर के खेल और इसकी सप्लाई से जुड़ी पूरी व्यवस्था पर आई-नेक्स्ट ने सवाल उठाते हुए इसकी पड़ताल सामने रखी थी।
खबर प्रकाशित होने के बाद खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) हरकत में आया। विभाग ने जांच और छापामार कार्रवाई तेज की तो अब लैब रिपोर्ट ने मिलावट के खेल की तस्वीर सामने रख दी है। एक अप्रैल से अब तक पनीर, खोआ और घी के जांचे गए 96 नमूनों में 57 फेल मिले हैं। इनमें 23 नमूनों में नकली होने की पुष्टि हुई है।
यानी इन तीन प्रमुख दुग्ध उत्पादों के करीब 60 फीसदी नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे। जांच में घी में पाम ऑयल, वनस्पति तेल और एसेंस, जबकि पनीर और खोआ में स्टार्च, रिफाइंड और स्किम्ड मिल्क पाउडर जैसी चीजें मिली हैं।
आगरा वायर ने उठाया था सवाल, अब विभाग ने खोला मोर्चा
आगरा वायर ने अपनी पड़ताल में एनालॉग पनीर को लेकर बड़ा सवाल उठाया था कि आखिर दूध के नाम पर लोगों की थाली तक क्या पहुंच रहा है? बाजार में शुद्ध पनीर के साथ ऐसे उत्पादों की मौजूदगी और इनकी बिक्री पर निगरानी की व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े किए गए थे।
इसके बाद विभाग ने डेयरी उत्पादों की जांच का दायरा बढ़ाया। खासतौर पर ऐसे उत्पादों पर नजर रखी गई, जिन्हें दूध से तैयार वास्तविक दुग्ध उत्पादों के विकल्प के रूप में तैयार किया जाता है। नमूनों की जांच के बाद अब कई उत्पादों के फेल होने से साफ है कि त्योहारों के बीच मिलावट का खतरा केवल आशंका नहीं, बल्कि जांच में भी सामने आया है।
96 में 57 फेल, 23 निकले नकली
विभाग को पिछले महीनों में पनीर, खोआ और घी के 96 नमूनों की रिपोर्ट प्राप्त हुई। इनमें 57 नमूने फेल पाए गए। 23 नमूनों में उत्पाद के नकली होने की पुष्टि हुई।
दूध की स्थिति भी राहत देने वाली नहीं है। 111 नमूनों की रिपोर्ट में 81 नमूने मिलावटी अथवा नकली पाए गए। आंकड़े बताते हैं कि दूध और उससे तैयार होने वाले उत्पादों की गुणवत्ता पर लगातार निगरानी की जरूरत है।
घी में तेल, पनीर-खोआ में स्टार्च
जांच रिपोर्ट में घी के नमूनों में पाम ऑयल, वनस्पति तेल और एसेंस जैसी चीजें मिलीं। वहीं पनीर और खोआ के नमूनों में स्टार्च, रिफाइंड और स्किम्ड मिल्क पाउडर की मौजूदगी सामने आई।
यही वे चीजें हैं, जिनके इस्तेमाल से कम लागत में दूध जैसे उत्पाद तैयार किए जाते हैं। ऐसे उत्पादों को लेकर विभाग अब ज्यादा सतर्कता बरत रहा है।
त्योहार खत्म नहीं, खतरा अभी बाकी
रक्षाबंधन पर खोआ, पनीर और घी की मांग बढ़ी थी। अब जन्माष्टमी सामने है। दूध, दही, पनीर, खोआ और इनसे तैयार मिठाइयों की बिक्री फिर बढ़ने वाली है। ऐसे में मिलावटखोरों के लिए यह बड़ा बाजार बन जाता है।
इसी को देखते हुए खाद्य विभाग ने टीमों को सक्रिय किया है। बाजारों, डेयरी उत्पादों और मिठाई की दुकानों से नमूने लिए जाएंगे। विभाग का खास फोकस एनालॉग डेयरी उत्पादों की धरपकड़ पर है।
क्या है एनालॉग डेयरी उत्पाद?
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी राजेश गुप्ता के अनुसार एनालॉग कृत्रिम डेयरी उत्पाद होते हैं। इन्हें शुद्ध दूध से तैयार नहीं किया जाता। इनमें दूध की वसा और प्रोटीन की जगह पाम ऑयल, स्टार्च, सोया प्रोटीन और इमल्सीफायर जैसी चीजों का इस्तेमाल किया जाता है।
विभाग के अनुसार ऐसे उत्पादों में वास्तविक दुग्ध उत्पादों की तुलना में पोषक तत्वों की कमी हो सकती है। इनके लगातार सेवन को लेकर स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं भी हैं। यही वजह है कि शासन की सख्ती के बाद विभाग ने एनालॉग उत्पादों की जांच बढ़ाई है।
अब लाइसेंस पर भी कार्रवाई की तैयारी
एफएसडीए ने एनालॉग उत्पादों की पुष्टि होने पर नियमानुसार कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार नियमों के तहत फर्म का लाइसेंस निरस्त करने और प्राथमिकी दर्ज कराने की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है।
सहायक आयुक्त खाद्य द्वितीय महेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि डेयरी उत्पादों की जांच के लिए टीमों को सक्रिय किया गया है। जन्माष्टमी को देखते हुए भी अभियान चलाया जाएगा। किसी नमूने में एनालॉग या मिलावट की पुष्टि होने पर नियमानुसार कार्रवाई होगी और रिपोर्ट शासन को भी भेजी जाएगी।
आगरा वायर अपडेट : सवाल से कार्रवाई तक
आगरा वायर ने जब एनालॉग पनीर के खेल को सामने रखकर सवाल उठाया तो मुद्दा केवल एक उत्पाद तक सीमित नहीं रहा। इसके बाद विभाग ने जांच का दायरा बढ़ाया। अब लैब रिपोर्ट में सामने आए आंकड़े बता रहे हैं कि पनीर, खोआ और घी की शुद्धता को लेकर चिंता की वजह मौजूद है।
57 फेल नमूने और 23 में नकली की पुष्टि—ये आंकड़े सिर्फ कार्रवाई की कहानी नहीं बताते, बल्कि यह भी बताते हैं कि त्योहारों की मिठास के बीच मिलावट का खेल कितना बड़ा हो सकता है।
अब असली परीक्षा विभाग की है—क्या जन्माष्टमी से पहले जांच सिर्फ नमूने लेने तक रहेगी या मिलावट के पूरे नेटवर्क तक पहुंचेगी?

