शीर्षक: तवे का कबाब, सीख की खुशबू और जहांगीरी कोरमा: ताजनगरी के सबसे बेहतरीन नॉन-वेजिटेरियन फूड स्पॉट्स की सैर
विशेष फूड और क्युलिनरी एक्सपर्ट, आगरा
आगरा केवल हिंदू और जैन संस्कृतियों का ही केंद्र नहीं रहा है, बल्कि मुगलों की मुख्य राजधानी होने के कारण यहाँ के खान-पान पर शाही हरम और मुगलिया बावर्चीखाने की बहुत गहरी छाप है। यदि आप मांसाहारी (Non-Vegetarian) भोजन के शौकीन हैं और आपकी जीभ को असली, गाढ़े मसालों से युक्त मुगलाई स्वाद (Mughlai Cuisine) पसंद है, तो आगरा आपके लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है।
पुरानी दिल्ली के जामा मस्जिद इलाके की ही तरह, आगरा की पुरानी जामा मस्जिद के आस-पास के बाजार और सदर बाजार के कुछ आधुनिक फूड जॉइंट्स रात ढलते ही कबाबों की सोंधी खुशबू और तंदूर के धुएं से सराबोर हो जाते हैं। आइए, आगरा के नॉन-वेज इतिहास और यहाँ के सबसे मशहूर स्वाद ठिकानों की एक चटपटी सैर करते हैं।
जामा मस्जिद और मंटोला की तंग गलियां: पुराना मुगलाई स्वाद
शाम के 6 बजते ही आगरा की ऐतिहासिक जामा मस्जिद के पिछले हिस्से और मंटोला की गलियों का नजारा पूरी तरह बदल जाता है। लोहे की अंगीठियों पर दहकते कोयले और उन पर सिकते कबाबों से टपकती चर्बी की छनछन आवाज किसी भी फूडी को अपनी तरफ खींचने के लिए काफी है।
- सीख कबाब और बफ कबाब: यहाँ मिलने वाले कबाबों की खासियत यह है कि इन्हें बहुत ही बारीक पिसे हुए कीमे के साथ पारंपरिक मसालों, पपीते के पेस्ट (Meat Tenderizer) और हींग के मिश्रण से तैयार किया जाता है। कोयले की धीमी आंच पर सिकने के बाद ये कबाब इतने मुलायम हो जाते हैं कि मुंह में रखते ही मक्खन की तरह पिघल जाते हैं। इन्हें खमीर रोटी, कटी हुई प्याज और पुदीने की तीखी हरी चटनी के साथ दोने में परोसा जाता है।
‘मामा चिकन’ (Mama Paji Chicken Corner): आगरा का आधुनिक नॉन-वेज लीजेंड
यदि हम पुराने शहर से बाहर निकलकर आगरा के आधुनिक और सबसे लोकप्रिय नॉन-वेजिटेरियन ठिकाने की बात करें, तो सदर बाजार (Sadar Bazar) के पास स्थित ‘मामा चिकन’ (जिन्हें लोग मामा पाजी के नाम से भी जानते हैं) का नाम सबसे ऊपर आता है। यह स्थान आगरा के स्थानीय निवासियों, कॉलेज के युवाओं और बाहर से आने वाले पर्यटकों का सबसे पसंदीदा अड्डा है।
- सिग्नेचर डिश – चिकन कली मिर्च और तवा चिकन: मामा चिकन की सबसे मशहूर डिश है उनका ‘चिकन काली मिर्च’ (Chicken Kali Mirch)। इसे काजू के गाढ़े पेस्ट, मलाई, दही और कुटी हुई काली मिर्च की एक मखमली सफेद ग्रेवी में पकाया जाता है। इसका स्वाद बहुत तीखा नहीं होता, बल्कि बेहद मलाईदार और शाही होता है। इसके अलावा, उनका ‘तवा चिकन’ और ‘चिकन टिक्का’ भी अपनी निरंतर क्वालिटी और बेहतरीन स्वाद के लिए जाना जाता है। इस दुकान की खासियत यह है कि यहाँ का माहौल बेहद जीवंत रहता है और लोग अपनी गाड़ियों में बैठकर (Drive-in Dining) भी यहाँ के भोजन का आनंद लेते हैं।
‘प्रकाश लोक’ का जहांगीरी चिकन कोरमा
आगरा के संजय प्लेस और भगवान टॉकीज के पास स्थित कुछ पुराने रेस्टोरेंट अपने ‘जहांगीरी चिकन कोरमा’ और ‘मटन रोगन जोश’ के लिए मशहूर हैं। मुगलाई कोरमे की असली पहचान उसकी ग्रेवी का दानेदार होना है, जो भुनी हुई प्याज (बरिस्ता) और मगज के सही इस्तेमाल से आती है। खमीरी रोटी या बटर नान के टुकड़े को जब आप इस गाढ़ी, रोगन से भरी ग्रेवी में डुबोकर खाते हैं, तो आपको सीधे मुगलों के शाही दौर के वैभव का अहसास होता है।
फूडीज के लिए टिप्स:
पुराने आगरा (जामा मस्जिद और मंटोला) के नॉन-वेज स्पॉट्स पर जाने के लिए शाम का समय सबसे अच्छा है। चूंकि ये इलाके बेहद व्यस्त और संकरे हैं, इसलिए अपनी चार पहिया गाड़ी को बाहर ही पार्क करें और ऑटो या ई-रिक्शा के जरिए अंदर जाएं। स्वच्छता के प्रति अत्यधिक संवेदनशील लोग सदर बाजार के स्थापित और बड़े आउटलेट्स (जैसे मामा चिकन या पिंटू कबाब) को प्राथमिकता दे सकते हैं, जहां स्वाद और साफ-सफाई दोनों का बेहतरीन समन्वय मिलता है।

