आगरा का एग्रीटेक (AgriTech) इकोसिस्टम: आलू बेल्ट में ड्रोन, आईओटी सेंसर और सटीक खेती (Precision Farming) की शुरुआत

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शीर्षक: खेतों में टेक का तड़का: कोहरे की मार से आलू की फसल को बचाने के लिए आगरा के किसान कैसे ले रहे हैं सैटेलाइट डेटा और एआई की मदद

विशेष कृषि-तकनीक विशेषज्ञ, आगरा

आगरा जिला केवल पर्यटन के लिए ही नहीं, बल्कि कृषि के क्षेत्र में भी एक बहुत बड़ा नाम है। यह पूरा क्षेत्र भारत के सबसे बड़े आलू उत्पादक बेल्ट (Potato Belt) के अंतर्गत आता है। लेकिन पारंपरिक खेती में किसानों को हमेशा मौसम की बेरुखी, कीटों के हमले और कोल्ड स्टोरेज की अव्यवस्था के कारण भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ता था। इस समस्या का समाधान करने के लिए पिछले कुछ वर्षों में आगरा के ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में एग्रीटेक (AgriTech) यानी कृषि-तकनीक का तेजी से प्रसार हुआ है। आज, आगरा के प्रगतिशील किसान अपने खेतों में मिट्टी की नमी मापने वाले सेंसर, फसल की निगरानी करने वाले ड्रोन और एआई-आधारित मौसम पूर्वानुमान प्रणालियों का उपयोग कर रहे हैं, जिसने पारंपरिक खेती को ‘सटीक खेती’ (Precision Farming) में बदल दिया है।

कृषि ड्रोन (Agricultural Drones): कीटनाशकों का स्मार्ट और सुरक्षित छिड़काव

आगरा के खेतों में अब आसमान में उड़ते हुए ड्रोन देखना कोई अचरज की बात नहीं है। स्थानीय एग्रीटेक स्टार्टअप्स किसानों को ‘ड्रोन-एज-ए-सर्विस’ (Drone-as-a-Service) मॉडल पर रिमोट-कंट्रोल ड्रोन किराए पर दे रहे हैं।

  • सटीक और त्वरित छिड़काव: जहां एक एकड़ खेत में हाथ से कीटनाशक छिड़कने में एक मजदूर को पूरा दिन लग जाता था और उसके स्वास्थ्य को भी खतरा रहता था, वहीं आधुनिक कृषि ड्रोन केवल 10 से 12 मिनट में पूरे एक एकड़ खेत पर समान रूप से छिड़काव कर देते हैं। ये ड्रोन थर्मल और मल्टीस्पेक्ट्रल कैमरों से लैस होते हैं, जो आसमान से ही यह देख लेते हैं कि खेत के किस हिस्से में बीमारी लगी है और केवल उसी प्रभावित हिस्से पर दवा गिराते हैं, जिससे इनपुट्स की भारी बचत होती है।

आईओटी (IoT) सेंसर और सॉयल हेल्थ मॉनिटरिंग

आलू की फसल के लिए मिट्टी में नमी और तापमान का सही संतुलन होना बेहद जरूरी है, विशेष रूप से सर्दियों के दिनों में जब पाला (Frost) पड़ने का खतरा सबसे ज्यादा होता है।

  • स्मार्ट सॉयल सेंसर: किसानों ने अपने खेतों की मिट्टी के भीतर इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) पर आधारित छोटे सेंसर लगाए हैं। ये सेंसर लगातार मिट्टी के नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटेशियम (NPK) स्तर और नमी के डेटा को सीधे किसान के स्मार्टफोन पर एक ऐप के जरिए भेजते रहते हैं। जैसे ही मिट्टी सूखने लगती है, ऐप किसान को पानी चलाने का अलर्ट भेज देता है, जिससे पानी और बिजली दोनों की बर्बादी रुकती है।

एआई-आधारित ‘अर्ली वॉर्निंग सिस्टम’ और कोल्ड स्टोरेज टेक

आगरा के एग्रीटेक स्टार्टअप्स ने स्थानीय कोल्ड स्टोरेज चेन को भी पूरी तरह से डिजिटल कर दिया है।

  • ब्लाइट डिसीज प्रेडिक्शन: आलू की फसल में ‘लेट ब्लाइट’ (Late Blight) नाम की बीमारी महामारी की तरह फैलती है। एआई एल्गोरिदम स्थानीय मौसम के डेटा (आर्द्रता, तापमान और हवा की गति) का विश्लेषण करके 48 घंटे पहले ही किसानों को चेतावनी जारी कर देते हैं कि आपके क्षेत्र में बीमारी फैलने की अनुकूल परिस्थितियां बन रही हैं, ताकि किसान पहले से ही सुरक्षात्मक छिड़काव कर सकें।
  • स्मार्ट कोल्ड स्टोरेज: आईओटी सेंसर की मदद से कोल्ड स्टोरेज के भीतर के तापमान को हमेशा 3 से 4 डिग्री सेल्सियस पर स्थिर रखा जाता है। यदि कंप्रेसर में कोई खराबी आती है या तापमान बढ़ता है, तो स्टोरेज के मालिक और किसान दोनों के फोन पर तुरंत क्लाउड अलर्ट चला जाता है, जिससे लाखों टन आलू सड़ने से बच जाता है।

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